डाक्टर की समस्या से नही मिली निजात सो फीस वना आरोग्यं धाम। बमुश्किल दिन मे आते तीन चार मरीज
डाक्टर की समस्या से नही मिली निजात
सो फीस वना आरोग्यं धाम। बमुश्किल दिन मे आते तीन चार मरीज
*रमेश अग्रवाल, पन्ना* –
लगभग चालीस वर्ष पूर्व खुले शासकीय स्वास्थ्य केंद्र मे हर समय डाक्टर न होने की समस्या से मरीज जूझते आ रहे। लम्बे अन्तराल के वाद भी डाक्टर न होने की समस्या से आज तक निजात नही मिली जिसके चलते आरोग्यं धाम मे तीन चार मरीज बमुश्किल आते हैं। कुल मिलाकर अस्पताल मात्र सो फीस वनकर रह गया है। वैसे तो शासन नाना तरह की स्वास्थ्य की योजना वनाता है लेकिन वे सब मात्र कागजी घोड़ों मे ही दम तोड़ती नजर आती हैं। परिणाम आम गरीब मरीजों को खासी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। डाक्टर न होने से मरीजों को छोटी छोटी बीमारी मे भी जिला अस्पताल या अन्यत्र जगह जाकर अपना इलाज कराना पड़ता है या झोला छाप डॉक्टरों से लुटने पर मजबूर होना पड़ता है। आखिर जब डाक्टर ही नही तो अस्पताल खोलना किस काम का । क्या छोटे छोटे कर्मचारियों के वलवूते अस्पताल मे मरीजों का इलाज संभव है अगर नही तो दसों कर्मचारियों का वोझ शासन क्यों उठाती है। क्यों लाखों रुपए खर्च करती है क्यों नाना तरह की योजना चलाकर अनावश्यक मद खर्च करती है। इससे तो यही लगता है कि शासन केवल दिखावा कर वाहवाही लूटना चाहती है। उसे आम गरीब मरीजों से कोई लेना देना नही। सबसे अहम तो यह कि अनेकों बार नगर के आम जनों ने प्रशासन को ज्ञापन दिए हड़ताल की लेकिन डाक्टर की समस्या जस कि तस आज भी बरकरार है। परिणाम आम जनों ने अब प्रशासन से उम्मीद छोड़ मौन रहना ही सीख लिया है। क्योंकि न तो प्रशासन और न ही कर्णधार स्वास्थ्य अधिकारी अर्थात कोई सुनने वाला ही नही तो चिल्लाने से क्या फायदा। इस सम्बन्ध मे केवल स्वास्थ्य अधिकारीयों से एक ही जवाब मिलता है कि जब डाक्टर है ही नही तो डॉक्टर कहां से भेजें। आश्चर्य तो यह कि एक डाक्टर को पदस्थ किया गया लेकिन आते कभी नही केवल वेतन ककरहटी स्वास्थ्य केंद्र से बनाई जाती है और सेवा जिला अस्पताल मे ली जा रही है। डाक्टर न होने की विकराल समस्या से नगर व ग्रामीण क्षेत्र के आम गरीब मरीजों को कब निजात मिलेगी यह वक्त ही बताएगा।



